शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

वित्त मंत्री ने की बैंककर्मियों से हड़ताल पर न जाने की                               अपील


 वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी संगठनों से अपील की है कि वे अपनी चार दिन की प्रस्तावित हड़ताल को वापस ले लें। वित्त मंत्री ने कहा कि हड़ताल में शामिल होने की न तो कोई जरूरत है और न ही यह देश के हित में है। द्विपक्षीय मुद्दे को सुलझाने के लिए सौहार्दपूर्ण बातचीत सबसे अच्छा तरीका है।
सरकारी क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर 25 फरवरी से चार दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इसी दौरान 28 फरवरी को बजट पेश होना है। इसे देखते हुए जेटली ने बैंकों के कर्मियों से यह अपील की है कि वे व्यवधानकारी तरीके न अपनाएं और हड़ताल पर न जाएं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की मांगों के संबंध में उनकी यूनियनों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसलिए बैंक कर्मचारियों को विरोध प्रदर्शन का तरीका नहीं अपनाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी द्विपक्षीय मुद्दे को सुलझाने के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत सबसे अच्छा तरीका है।
बैंक यूनियनों का कहना है कि बैंक अपने खातों में 15 प्रतिशत वेतनवृद्धि दिखा रहे हैं, जबकि वे कर्मचारियों के समक्ष 13 प्रतिशत की वेतनवृद्धि की पेशकश कर रहे हैं। इसलिए बैंकिंग कर्मचारियों को यह मंजूर नहीं है। बैंकिंग कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री जन धन योजना को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके बावजूद मोदी सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। इसलिए बैंक कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।
जो वेतन समझौता  अगस्त २०१२ में होना था वो मार्च २०१५ तक नहीं होते दिख रहा।  अब कर्मचारी कब तक सब्र करेंगे।  कहीं से भी उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा है। 

शुक्रवार, 9 मई 2014


सुब्रत राय की जमानत यचिका खारिज

नई दिल्ली। दिल्ली। निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपए लौटाने संंबंधी सभी आदेशों को ‘व्यवस्थित तरीके से’ नजरअंदाज करने के लिए सहारा समूह को फटकार लगाते हुए उच्चतम न्यायालय ने आज इसके प्रमुख सुब्रत रॉय की स्वयं को हिरासत में रखे जाने के खिलाफ दायर की गई याचिका खारिज कर दी और कहा कि उन्हें जेल में रखना ‘वैध’ है। सहारा प्रमुख को हिरासत में रखने के आदेश को बरकरार रखते हुए न्यायालय ने समूह से कहा कि वह जमानत लेने के लिए 10 हजार करोड़ रूपए जमा कराने का नया प्रस्ताव तैयार करे।   न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहर की पीठ ने न्यायालय का आदेश न मानने और ‘अवज्ञापूर्ण बर्ताव’ करने के लिए रॉय और समूह की कड़े शब्दों में निंदा की। ..

मंगलवार, 6 मई 2014

मेडिकल कॉलेज से 2011 बैच के 3 फर्जी छात्र बर्खास्त

|May 06, 2014, 
सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने २०११ बैच के तीन फर्जी छात्रों को निष्कासन कर दिया है। दो दिन पहले व्यापम ने पीएमटी परीक्षा निरस्त कर करते हुए डीएमई को सूची भेजी थी। बीएमसी के जिन विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है उनमें १ छात्रा व २ छात्र शामिल हैं।
 
पीएमटी २०११ के माध्यम से चयनित व काउंसिलिंग के बाद बीएमसी में प्रवेश लेने वाला देवास निवासी शांतनु व्यास, नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा निवासी पंकज दुबे एवं भिंड निवासी नेहा पचौरी का प्रवेश निरस्त कर दिया गया है। बीएमसी डीन कार्यालय से शाम छह बजे के बाद फर्जी छात्रों के निष्कासन का आदेश जारी किया गया।
 
इन छात्रों पर पीएमटी परीक्षा के दौरान नकल करने, इसके लिए अधिकारियों से मिलीभगत के आरोपों की जांच के बाद व्यापम ने सामूहिक रूप से ९८ छात्रों की पीएमटी परीक्षा निरस्त शुक्रवार को निरस्त कर दी थी।

फर्जी छात्रों में दो सागर निवासी हैं

व्यापम द्वारा २०११ सत्र की पीएमटी परीक्षा में शामिल हुए जिन ९८ छात्रों की परीक्षा निरस्त कर सूची जारी की गई है, उसमें दो छात्र सागर के निवासी भी हैं। ं शासकीय कस्तूरबा हायर सेकंडरी स्कूल भोपाल के परीक्षा केंद्र पर बैठा सागर निवासी हिमांशु जैन जिसका रोल नंबर २०६२१२ एवं शासकीय कमला नेहरू कन्या हायर सेकंडरी स्कूल भोपाल केंद्र पर बैठा सागर निवासी निखिल जैन जिसका रोल नंबर २०७२२८ था, दोनों फर्जी छात्रों की सूची में शामिल हैं। हालांकि इन दोनों ने प्रदेश के किस कॉलेज में प्रवेश लिया इसकी जानकारी सूची में नहीं दी गई है।

प्रवेश निरस्त कर दिया गया है

व्यापम द्वारा २०११ बैच के जिन ९८ फर्जी छात्रों की परीक्षा निरस्त कर दी गई है। उसमें एक छात्रा व दो छात्र बीएमसी में पढ़ रहे थे। संचालनालय से सूची मिलने के बाद सोमवार को इनके प्रवेश निरस्त कर दिए गए हैं। -  डॉ. एलपी वर्मा, डीन बीएमसी, सागर
 

सोमवार, 28 अप्रैल 2014



पीएससी में पास हुए 42 उम्मीदवार अयोग्य




इंदौर [नप्र]। मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2012 के नतीजे शुक्रवार को जारी कर दिए। अक्टूबर 2013 में आयोजित हुई मुख्य परीक्षा के नतीजों में कुल 1,191 उम्मीवारों को अर्ह घोषिषत किया गया है। पीएससी ने 42 उम्मीदवारों को परीक्षा में पास होने के बावजूद अयोग्य घोषिषत कर दिया है। इन उम्मीदवारों को उत्तर पुस्तिका पर पहचान चिह्न बनाने का दोषषी माना गया है।
कुल 400 पदों के लिए आयोग ने मुख्य परीक्षा आयोजित की थी। चयनित उम्मीदवार अब साक्षात्कार में शामिल होंगे। इन विद्यार्थियों को 20 मई तक अपने प्रमाणित दस्तावेज पीएससी कार्यालय में जमा करवाने हैं। 30 जुलाई से साक्षात्कार का दौर शुरू होगा।
ढाई सौ दोषी
पहली बार आयोग ने चयन सूची जारी करने के साथ ही ऐसे उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी की है जिन्हें कॉपी पर पहचान चिह्न बनाने का दोषी माना गया है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा के हस्ताक्षर से लिस्ट जारी की गई है। आयोग के अनुसार लिखित परीक्षा में शामिल कुल 248 उम्मीदवार को कॉपी में अपने पहचान चिह्न दर्ज करने का दोषषी माना गया है। पीएससी के परीक्षा नियमों का उल्लंघन करने के कारण इन सभी की परीक्षा निरस्त कर दी गई है। इनमें से 42 उम्मीदवार ऐसे थे जो अंकों के लिहाज से मुख्य परीक्षा में चयनित हो रहे थे, लेकिन पहचान चिह्न दर्ज करने के कारण इनकी परीक्षा भी निरस्त कर दी गई।
इसलिए अयोग्य
पीएससी समेत अन्य परीक्षाओं में भी नियम है कि कॉपी पर निर्दिष्ट स्थानों को छोड़कर अन्य जगह पर उत्तरों के अलावा किसी तरह का कोई संकेत नहीं लिखा जा सकता। अंदर के पन्नों पर विशेषष रंग की स्याही का प्रयोग, नाम लिखना, कोई निशान या चिह्न बनाना या रोल नंबर लिखने को अपनी पहचान बताने का प्रयास माना जाता है। ऐसे निशान के आधार पर मूल्यांकन में धांधली की आशंका रहती है। लिहाजा नियमानुसार ऐसे उम्मीदवारों की परीक्षा निरस्त की जा सकती है।